Why Borrow ? : Avoid repeated cost on books buying or renting .You can take more risks in reading because you don’t have to commit to buying everything you read.If you don’t like a book, just take it back. Borrow Now
Why Borrow ? : Avoid repeated cost on books buying or renting .You can take more risks in reading because you don’t have to commit to buying everything you read.If you don’t like a book, just take it back. Borrow Now
About Book : प्रतिनिधि हिंदी बाल-नाटक बच्चों की झिझक मिटाने के साथ-साथ उन्हें विभिन्न अवसरों पर अपने मनोभावों को अभिव्यक्त करने की कला सिखाते हैं । इससे बच्चों का जीवन व्यवहार और व्यक्तित्व सुंदर और सार्थक बनता है। नाटक उनकी कल्पनाशक्ति को जागृत कर उनके अनुभव क्षेत्र को बढ़ाने में भी सहायक होते हैं। बच्ची को भरपूर मनोरंजन और सरल संवाद वाले नाटक ज्यादा पसंद आते हैं। लंबे समय तक बाल-नाटकों का शिक्षाप्रद होना भी जरूरी माना जाता रहा। किंतु छठे दशक के बाद बाल-साहित्य में मौलिकता और स्वतंत्र चिंतन को महत्त्व मिला तो बाल नाटक भी बड़े-बड़े आदेशों के बंधन से मुक्त हुए। बच्चों के नाटकों की दिशा में द्विवेदी युग और उसके बाद भी कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई। उनके लिए अलग से नाटकों की रचना हो' पर स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद गंभीरता से विचार किया गया। व्यक्तिगत प्रयासों के अतिरिक्त बच्चों की पत्र-पत्रिकाओं ने इसमें महत्त्वपूर्ण योगदान किया। प्रतिनिधि हिंदी बाल-नाटक से उम्मीद है कि बच्चों को मंच पर प्रस्तुत करने के लिए विविध रंगों के नाटक एक जगह उपलब्ध होंगे। संचयन में, नाटकों का चुनाव करते हुए इसके संपादक हरिकृष्ण देवसरे का यह प्रयास रहा है कि ये नाटक न केवल रोचक, मनोरंजक और अभिनेय हों, बल्कि वे किसी-न-किसी रूप में बच्चों के अपने संसार का अंग हों। नाटक छोटे और प्रभावशाली हों, इसका भी ध्यान रखा गया है।
- About Author : हरिकृष्ण देवसरे (जन्म : 1940, निधन 2013 ) बाल साहित्य के सृजन, संपादन तथा प्रकाशन के क्षेत्र में विगत पचास वर्षों से सक्रिय सबसे महत्त्वपूर्ण नाम । बच्चों के लिए लिखी तीन सौ से अधिक पुस्तकें प्रकाशित कई धारावाहिकों, वृत्तचित्रों एवं टेलीफ़िल्मों के लिए भी लेखन। बाल-साहित्य के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार (2012) के अतिरिक्त पच्चीस से अधिक पुरस्कार/सम्मान, जिनमें प्रमुख हैं भारतीय बाल-साहित्य परिषद्, साहित्य कला परिषद्, हिंदी अकादमी दिल्ली, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान परिषद् द्वारा दिए गए पुरस्कार/सम्मान। आकाशवाणी से 1984 में स्वैच्छिक अवकाश प्राप्त कर टाइम्स ऑफ़ इंडिया प्रकाशन समूह की बाल-पत्रिका परागके संपादक बने। 1991 में इस दायित्व से मुक्त हो, स्वतंत्र लेखन करते रहे।
- Book format : Hardcover
- ISBN : 978-81-260-4305-7
- Language: Hindi
- Book Genre: Fiction
- Publisher: Sahitya akademi
- Subscribe now :https://www.borrowbuybooks.com/subscription
