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About Book : लोग असली जीवन भूल गए हैं, वे डुप्लीकेटी से ही काम चलाते हैं। जैसे एक इनसान गलती से अपने घर की चाभी निगल गया, लेकिन एक महीने के बाद डॉक्टर के पास गया और कहा, ‘मैं अपने घर की चाभी निगल गया हूँ, उसे निकलवाना है।’ डॉक्टर ने पूछा, ‘आपने चाभी कब निगली थी?’ उसने जवाब दिया, ‘एक महीना पहले।’ उस इनसान का यह जवाब सुनकर डॉक्टर हैरान रह गया और पूछा, ‘फिर आप अभी चाभी निकलवाने के लिए क्यों आए हैं? इतने दिन कैसे रहे?’ उसने जवाब दिया, ‘अब तक तो मैं अपनी डुप्लीकेट (नकली) चाभी से काम चला रहा था, लेकिन आज वह भी खो गई है, इसलिए तो ऑरिजनल (असली) चाभी निकलवाने के लिए आपके पास आया हूँ। आज ऑरिजनल चाभी की जरूरत पड़ी है।’ यदि इस चुटकुले को समझा जाए तो इसमें गहरी समझ छिपी है। चुटकुलेवाले इनसान पर तो हम आसानी से हँस लेते हैं, परंतु हम अपने जीवन में भी ऐसी गलती करते हैं। असली आनंद अंदर है, लेकिन लोग डुप्लीकेट आनंद से काम चलाते रहते हैं। जब वह आनंद भी खो जाता है तब वे सोचते हैं कि ‘चलो अभी सत्संग में चलते हैं, वहाँ कुछ तो मिलेगा।’ ऑरिजनल चाभी पाने के लिए आपको पहले चाहिए सोचने की तरकीब। तरकीब है थोड़ा सोचें, अच्छा सोचें। आइए, इस तरकीब का उपयोग सीखने के लिए कुछ करें। सोचने की यह तरकीब आपको इस पुस्तक द्वारा प्राप्त होगी।.
About Author : सरश्री की आध्यात्मिक खोज का सफर उनके बचपन से प्रारंभ हो गया था। इस खोज के दौरान उन्होंने अनेक प्रकार की पुस्तकों का अध्ययन किया। इसके साथ ही अपने आध्यात्मिक अनुसंधान के दौरान अनेक ध्यान पद्धतियों का अभ्यास किया। उनकी इसी खोज ने उन्हें कई वैचारिक और शैक्षणिक संस्थानों की ओर बढ़ाया। इसके बावजूद वे अंतिम सत्य से दूर रहे। उन्होंने अपने तत्कालीन अध्यापन कार्य को भी विराम लगाया, ताकि वे अपना अधिकसेअधिक समय सत्य की खोज में लगा सकें। जीवन का रहस्य समझने के लिए उन्होंने एक लंबी अवधि तक मनन करते हुए अपनी खोज जारी रखी, जिसके अंत में उन्हें आत्मबोध प्राप्त हुआ। आत्मसाक्षात्कार के बाद उन्होंने जाना कि अध्यात्म का हर मार्ग जिस कड़ी से जुड़ा है, वह है—समझ (अंडरस्टैंडिंग)। सरश्री कहते हैं, ‘सत्य के सभी मार्गों की शुरुआत अलगअलग प्रकार से होती है, लेकिन सभी के अंत में एक ही समझ प्राप्त होती है। ‘समझ’ ही सब कुछ है और यह ‘समझ’ अपने आप में पूर्ण है। आध्यात्मिक ज्ञानप्राप्ति के लिए इस ‘समझ’ का श्रवण ही पर्याप्त है।’ सरश्री ने दो हजार से अधिक प्रवचन दिए हैं और सत्तर से अधिक पुस्तकों की रचना की है। ये पुस्तकें दस से अधिक भाषाओं में अनूदित हैं और प्रमुख प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित की गई हैं।.
Product details
- Language : Hindi
- Author Name : sarshri
- Publisher : Perbhat prakashan
- Paperback : 200 pages
- ISBN : 978-93-5186-404-2
- Item Weight : 100 g
- Dimensions : 2 x 14 x 22 cm
