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About book : सम्पूर्ण चाणक्य नीति : सूत्र एवं अर्थशास्त्र सहित - लगभग 2350 वर्ष पूर्व लिखा गया यह कालजयी ग्रंथ-अर्थशास्त्र, राजनीतिशास्त्र तथा प्रशासन व्यवस्था पर आज भी पूर्णतयः प्रासंगिक है।
- चाणक्य वाणी
- जो मनुष्य जिस कार्य में निपुण हो, उसे वही कार्य सौंपना चाहिए। अपनी शक्ति को जानकर ही कार्य आरम्भ करें।
- रात्रि के अंत में, यानी प्रात: काल में, दिनभर के कार्यों पर विचार करना चाहिए।
- बुरे मित्र से तो समझदार शत्रु ही ठीक है।
- बुद्धिमान मानव का कोई शत्रु नहीं होता।
- व्यवहार से ही आचरण जाना जाता है।
- निपुणता कोई जरूरी नहीं कि अच्छे गुणों के कारण हो ।
- अत्याधिक चमकने पर भी जुगनू आग नहीं होता।
- विश्वासपाती की मुक्ति कभी नहीं होती।
- ज्ञानियों को संसार का भय नहीं होता।
- साधु पुरुष अपने जीवन को दूसरों की भलाई में लगा देते हैं।
- संयोग से कीट भी लकडी को कतरते-कतरते चित्रनुमा बना देता है। इसका मतलब यह नहीं कि वह चित्रकार है।
- About Author : Pt.Satya narain sharma
- Book format : Paperback.
- Number of pages : 224
- Publication house : Sakshi Prakashan
- Language : Hindi
- Book genre : Self improvment /Social / Spritiual
- ISBN : 81 -86265- 12-0
