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- About Book : सत्य और न्याय की स्थापना, संरक्षण और संवर्धन के लिए ही देश के संविधान ने विभिन्न संस्थाओं को नैतिक और कानूनी अधिकार दिये हैं। इन संस्थाओं के सुगम संचालन के लिए ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ लोगों को पदासीन किया गया है। संविधान का उद्देश्य अन्तिम मानव तक न्यायोचित, मानवीय अधिकारों को पहुंचाना है। लेखक अशोक कुमार पाण्डेय ने अन्याय के विरुद्ध संघर्ष किया है तथा अपने विरुद्ध होते अन्याय से अधिकारियों को अवगत कराते हुए न्याय की मांग की है, परन्तु लम्बी चलती न्याय-व्यवस्था, खर्चीली प्रक्रिया और असंवेदनशील व्यवहार ने न्याय के प्रति समाज को निराश किया है। आमरण अनशन, व्रत और आत्महत्या को बाध्य व्यक्ति यदि न्याय पाने में सफल नहीं हो सका है, तो क्या हमारी व्यवस्था लांक्षित नहीं होती है?
- About Author : Ashok kumar pandey
- Book format: Paperback
- Language: Hindi
- Book Genre: Non fiction - Social Education
- Number of pages: 136
- Publisher: Diamond books.
- ISBN : 978-93-5165-961-7
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- Book review :भारत भविष्य ? लेखक ने अन्याय के विरुद्ध संघर्ष किया है तथा अपने विरुद्ध होते अन्याय से अधिकारियों को अवगत कराते हुए न्याय की मांग की है, परन्तु लम्बी चलती न्याय-व्यवस्था, खर्चीली प्रक्रिया और असंवेदनशीलता के व्यवहार ने न्याय के प्रति श्री अशोक कुमार पाण्डेय को निराश किया है। डॉ राधाकृष्ण, एसोसिएट प्रोफेसर, के.ए. कॉलेज, कासगंज
- सूचना के अधिकार कानून के व्यापक जनहित में इस्तेमाल की दिशा में आपका कार्य अत्यंत प्रशंसनीय रहा है। साथ ही समाज में अन्य लोगों को भी सूचना के अधिकार कानून के प्रयोग की प्रेरणा मिली है। सूचना के अधिकार की आवाज बनने और इसका परचम लहराने में योगदान के लिए हम आपके आभारी हैं। हमें आशा है कि आप भविष्य में भी इसी उत्साह एवं निष्ठा से समाज को बेहतर बनाने में योगदान देते रहेंगे।-अरविंद केजरीवाल, मुख्यमंत्री, दिल्ली सरकार
- विलम्ब से न्याय मिलने की प्रक्रिया का अन्त हो, ऐसा मैं ईश्वर से कामना करता हूँ।-मनपाल सिंह, राज्य मंत्री, उ.प्र. शासन
- यह पुस्तक अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की गाथा है, जो देश वासियों को नयी राह दिखाती है।-जगबंधु मण्डल, एडवोकेट, कोलकाता हाईकोर्ट
