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About Book : कोई दो हजार वर्ष हुए, सी ह्यांग ती नाम का एक चीनी सम्राट था। उसे अपनी प्रजा से एक अजीब नाराजगी थी कि लोग इतना पढ़ते क्यों हैं, और जो लोग किताबें पढ़ नहीं सकते, वे उन्हें सुनते क्यों हैं? उसको विश्वास नहीं था कि अब तक जो पुस्तकें लिखी गयी वे चाहे इतिहास की हों या दर्शनशास्त्र की या फिर कथा-कहानियों उसका और उसके पूर्वजों का ही गुणगान किया गया है। कौन जाने ऐसे लेखक भी हों जिन्होंने सम्राट को बुरा-भला कहने की हिम्मत की हो! सी ह्यांग ती का कहना था कि प्रजा को पढ़ने और उन बातों से क्या मतलब उसे तो चाहिए कि कस कर मेहनत करे, चुपचाप राजा की आज्ञाओं का पालन करती जाय और कर चुकाती रहे। शांति तो बस ऐसे ही बनी रह सकती है। फिर क्या था उसने आदेश दिया कि सब पुस्तकें नष्ट कर दी जायें। उन दिनों पुस्तकें ऐसी नहीं थीं जैसी आज होती हैं। तब छापेखाने तो थे नहीं, लकड़ी के टुकड़ों पर अक्षर खुदे रहते थे। ये ही पुस्तकें थीं। उन्हें छिपाकर रखना भी तो आसान नहीं था। सम्राट के आदमियों ने राज्य का चप्पा-चप्पा छान मारा। नगर-नगर और गांव-गांव घूमकर जो पुस्तक हाथ लगी, उसकी होली जला यह बात तब की है जब चीन की बड़ी दीवार का निर्माण हो रहा था ढेर सारी पुस्तकें, जो कि बड़े-बड़े गोल लट्ठों के रूप में थीं-पत्थरों की जगह दीवार में चिन दी गयीं। अगर किसी विद्वान ने अपनी पुस्तकें देने से इंकार किया तो उसे किताबों सहित बड़ी दीवार में दफना दिया गया। ऐसा था पढ़नेवालों पर राजा का क्रोध! (from book) .
Product detail
- Author : Manoj Das
- Language : Hindi
- ISBN : 812370027-X
- Publisher : National book trust
- paperback : 64 Pages
