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About Book : भारतवर्ष में जितने वेदमतानुयायी दर्शनशास्त्र हैं, उन सबका एक ही लक्ष्य है, और वह है-पूर्णता प्राप्त करके आत्मा को मुक्त कर लेना । इसका उपाय है योग। 'योग' शब्द बहुभावव्यापी है। सांख्य और वेदान्त उभय मत किसी-न-किसी प्रकार से योग का समर्थन करते हैं।
प्रस्तुत पुस्तक का विषय है-'राजयोग'। पातञ्जलसूत्र राजयोग का शास्त्र है और राजयोग पर सर्वोच्च प्रामाणिक ग्रन्थ है। स्वामी विवेकानंद ने न्यूयॉर्क में कुछ छात्रों को इस योग की शिक्षा देने के लिए जो व्याख्यान दिए थे, वे ही इस पुस्तक के प्रथम अंश में निबद्ध हैं, और इसके दूसरे अंश में पतंजलि के सूत्र, उन सूत्रों के अर्थ और उन पर संक्षिप्त टीका भी सन्निविष्ट कर दिया गया है। जहाँ तक संभव हो सका, पारिभाषिक शब्दों का प्रयोग न करने और वार्तालाप को सहज और सरल भाषा में लिखने का यत्न किया गया है।
Product details
- Language : Hindi
- Author Name : swami vivekanand
- Publisher : Sakshi paperbacks
- Formatting : Paperback
- ISBN : 978-93-84456-21-4
