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About Book : 'प्रेमयोग' में स्वामी विवेकानन्द द्वारा दिये गये विभिन्न व्याख्यानों से उद्धृत प्रेम एवं भक्ति सम्बन्धी आलेखों को संकलित किया गया है । प्रेमयोग अर्थात् परमात्मा के प्रति प्रेम प्रदर्शित करने, प्रेममय होने से पूर्व साधक की पूर्व साधना पर बल दिया गया है जिसमें 'प्रेम की महत्ता का विशद वर्णन है। पुस्तक में जहाँ प्रेम-स्वरूप भक्ति के आयामों की चर्चा की गई है; वहीं प्रतिमा, प्रतीक, इष्ट आदि को भी व्याख्यायित किया गया है। पूर्वभक्ति तथा पराभक्ति के अन्तर्गत प्रेम और प्रेमी, आत्मा और परमात्मा का तर्कपूर्ण विश्लेषण करते हुए सिद्ध किया गया है कि प्रेम, प्रेमी और प्रेमास्पद अर्थात् भक्ति, भक्त और भगवान्–तीनों एक ही हैं।
About Author : विवेकानंद अपने समय का चलता-फिरता विश्वकोश (इंसाइक्लोपीडिया) ये। उनका साहित्य पढ़ते समय महसूस होता है कि हम ज्ञान के अधाह-सागर में गोते लगा रहे हैं । उन्होंने न सिर्फ अपने देश का बल्कि दुनिया भर का इतिहास और दर्शन खंगाल डाला था ।
Product details
- Language : Hindi
- Author : Swami Vivekanand
- Publisher : Sakshi paperbacks
- Paperback : 80 pages
- ISBN : 978-93-84456-19-1
- Item Weight : 110 g
- Dimensions : 21.59 x 13.97 x 0.47 cm
