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- About book -चंद्रगुप्त मौर्य लगभग 2,500 वर्ष पूर्व भारत छोटे-छोटे गणराज्यों और जनपदों में बँटा हुआ था। आंतरिक कलह और परस्पर दुश्मनी के कारण पूरा देश बिखरता जा रहा था। शासक ऐयाशी करने और धन लुटाने में निमग्न थे, अपनी सारी जिम्मेदारियाँ भूल चुके थे। कुछ महत्त्वाकांक्षी राजा सीमा-विस्तार के अभियान में इतने जुटे थे कि प्रजा में असंतोष पनप रहा था। नैतिकता के नाम पर राजाओं का अहंकार विकास की सीढ़ियों को दीमक की तरह चाट रहा था। देश का अस्तित्व खतरे में था। आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, कला आदि क्षेत्र अस्थिरता के शिकार थे। ऐसे में चाणक्य जैसे महान् दार्शनिक, विद्वान्, राजनीतिज्ञ, अर्थशास्त्री और राष्ट्र-हितैषी के रूप में महान् गुरु और चंद्रगुप्त * जैसे महान् सम्राट् का उदय हुआ। उन्हीं दिनों विदेशी शक्तियाँ भारत की ओर लगातार कदम बढ़ा रही थीं। लेकिन इन विषम परिस्थितियों में चाणक्य की दूरदर्शिता काम आई और चंद्रगुप्त मौर्य ने संपूर्ण भारत को एकता के सूत्र में बाँधकर नवीन भारत की स्थापना की। चंद्रगुप्त के पिता, वंश, जन्म-स्थान आदि को लेकर इतिहासकारों और विद्वानों में मतभेद है। फिर भी, माना जाता है कि चंद्रगुप्त के पिता पिप्पलिवन गणराज्य के प्रमुख थे। वे मोरिय वंश के थे मोरिय वंश से संबंध होने के कारण चंद्रगुप्त के नाम के साथ 'मौर्य' जुड़ा।
- About Author - Dilip Kumar Lal
- Book format - Paper back
- ISBN : 978-93-5048-583-5.
- Language: Hindi
- Book Genre: Non fiction - Biography
- Publisher: Prabhat Prakashan
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