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About book : "द्वार नहीं खुले" भगवती कुमार शर्मा द्वारा रचित एक प्रभावशाली उपन्यास है, जो समाज, परिवार और व्यक्तिगत संघर्षों के विभिन्न पहलुओं को उजागर करता है। इस उपन्यास में लेखक ने व्यक्ति और समाज के बीच के द्वंद्व, पारिवारिक संघर्षों और मानसिक तनावों को बड़ी ही सजीवता और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया है।कहानी का मुख्य पात्र एक साधारण व्यक्ति है जो अपने जीवन में अनेक समस्याओं और कठिनाइयों का सामना करता है। उसके जीवन में आने वाले हर मोड़ पर नए-नए संघर्ष और चुनौतियाँ हैं, जिनसे उसे जूझना पड़ता है।
इस उपन्यास में मुख्य रूप से निम्नलिखित विषयों पर प्रकाश डाला गया है:
पारिवारिक संघर्ष: पात्र के परिवार में आपसी मनमुटाव और संघर्षों का चित्रण किया गया है। पारिवारिक रिश्तों में उत्पन्न होने वाले तनाव और दूरियों को लेखक ने बड़े ही संवेदनशील ढंग से पेश किया है।
सामाजिक समस्याएं: उपन्यास में समाज में व्याप्त कुरीतियों और समस्याओं को भी उजागर किया गया है। लेखक ने समाज के प्रति व्यक्ति की जिम्मेदारियों और समाज से मिलने वाली चुनौतियों का वर्णन किया है।
आत्म-संघर्ष: मुख्य पात्र के मनोवैज्ञानिक संघर्ष और आंतरिक द्वंद्व को बड़ी ही कुशलता से चित्रित किया गया है। उसकी मनोस्थिति, उसके सपने और वास्तविकता के बीच के संघर्ष को लेखक ने बखूबी पेश किया है।
मानवता और नैतिकता: कहानी में नैतिक मूल्यों और मानवता के प्रति आस्था को भी प्रमुखता दी गई है। व्यक्ति के जीवन में नैतिकता और मानवीय मूल्यों का महत्व बताया गया है।
"द्वार नहीं खुले" एक ऐसा उपन्यास है जो पाठकों को न केवल मनोरंजन प्रदान करता है बल्कि उन्हें जीवन के विभिन्न पहलुओं पर सोचने के लिए भी प्रेरित करता है। भगवती कुमार शर्मा की लेखनी में जीवन की गहराई और संवेदनशीलता का अद्भुत समावेश है, जो इस उपन्यास को एक यादगार और महत्वपूर्ण कृति बनाता है।
Product details
- Language : Hindi
- Author Name : bhgvati kumar sharma
- Publisher : bhartiya gyanpeeth
- Hardcover : 173 pages
