Rangbhoomi by Premchand

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  • Author Name : Prem Chand
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About book -  ग्राम्य समाज मुंशी प्रेमचंद की कहानियों और उनके उपन्यासों का मूल विषय रहा है। गांवों के निम्न स्तरीय समाज की दुर्दशा, संवेदनाओं और पीड़ा को प्रेमचंद ने न केवल अपने कथा-साहित्य में जहां-तहां चित्रित ही किया, बल्कि उन संवेदनाओं और पीड़ा को स्वयं भी सहा है। 'रंगभूमि' मुंशी प्रेमचंद का एक ऐसा उपन्यास है जिसमें एक जन्म से अंधा व्यक्ति सूरदास अपने पुरखों की जमीन को अपने ग्रामीण भाई-बंधुओं के इस्तेमाल के लिए छोड़ देता है और खुद भीख मांग-मांगकर गुजारा करता है...किंतु जब इसी जमीन को कुछ स्वार्थी लोग चांदी के चंद सिक्के देकर हथियाना चाहते है तो वह अड़ जाता है। स्वार्थी लोग गांव के शहरीकरण में गांव के विकास की चर्चा करते हैं, जबकि सूरदास शहरीकरण में गांव का विनाश कहकर जन-जागृति का अभियान शुरू करता है और अंततः उसी की जीत होती रंगभूमि के इस अंधे सूरदास में मुंशी प्रेमचंद ने जैसे सम्पूर्ण भारत के ग्राम्य समाज को संजो दिया है।

About author - Munshi Premchand

Book format - Paperback

ISBN : 8176041459

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