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About Book : कहानी की शुरुआत में लहना सिंह और सुभागी के बचपन का वर्णन है। दोनों बचपन में अच्छे दोस्त थे। लहना सिंह को सुभागी से प्रेम हो जाता है, लेकिन वह अपने प्रेम को व्यक्त नहीं कर पाता। एक दिन सुभागी लहना से पूछती है, "तुम्हारी मुझसे शादी होगी?" लहना सिंह जवाब देता है, "हाँ, होगी।" लेकिन परिस्थिति ऐसी बनती है कि वे दोनों एक-दूसरे से अलग हो जाते हैं।
कई साल बाद, लहना सिंह और सुभागी का पुनर्मिलन होता है, लेकिन अब सुभागी शादीशुदा है। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान लहना सिंह और सुभागी का पति दोनों एक ही बटालियन में सैनिक हैं। लहना सिंह अपने कर्तव्यों और अपने प्रेम के बीच संघर्ष करता है।
युद्ध के दौरान लहना सिंह को सुभागी के पति की रक्षा करने का मौका मिलता है। वह अपने प्राणों की परवाह किए बिना सुभागी के पति की जान बचाता है। यह जानते हुए कि सुभागी के पति की रक्षा करके वह सुभागी को हमेशा के लिए खो देगा, फिर भी वह अपने प्रेम और कर्तव्य को प्राथमिकता देता है।
चंद्रधर शर्मा 'गुलेरी' की लेखन शैली सरल, सजीव, और भावनात्मक है। उन्होंने पात्रों के मनोविज्ञान को बारीकी से उकेरा है और उनके संवादों में वास्तविकता का पुट है। कहानी की सादगी और गहराई पाठकों के मन में गहरी छाप छोड़ती है।
- Publisher : RG (1 January 2012)
- Language : Hindi
- Paperback : 32 pages
