Non Resident Bihari by Shashikant Mishra

0 (0 Reviews)
MRP.99 Rs. 49
  • Availability : In Stock
  • Author Name : Shashikant Mishr
  • Available to : Purchase / Borrow
  • Book condition : Good condition preloved book

Why Borrow ? : Avoid repeated cost on books buying or renting .You can take more risks in reading because you don’t have to commit to buying everything you read.If you don’t like a book, just take it back. Borrow Now

About Book : क्या होता है जब बिहार में थोड़े भी सम्पन्न परिवार में किसी बच्चे का जन्म होता है ? उसके जन्मते ही उसके बिहार छूटने का दिन क्यों तय हो जाता है? जब सभी जानते हैं कि मुँछ की रेख उभरने से पहले उसको अनजान लोगों के बीच चले जाना है-तब भी क्यों उसको गोलू मोलू-दुलारा बना के पाला जाता है? वही 'दुलारा बच्चा' जब आखिरकार ट्रेन में बिठाकर बिहार से बाहर भेज दिया जाता है तब क्या होता है उसके साथ ? सांस्कृतिक धक्के अलग लगते हैं, भावनात्मक अभाव का झटका अलग-इनसे कैसे उबरता है वह? क्यों तब उसको किसी दोस्त में माशूका और माशूका में सारे जहाँ का सुकून मिलने लगता है ? नॉन रेजिडेंट बिहारी के नायक राहुल की इतनी भर कहानी है-एक तरफ यूपीएससी और दूसरी तरफ़ शालू। यूपीएससी उसकी जिन्दगी है, शालू जैसे जिन्दगी की 'जिन्दगी'। एक का छूटना साफ दिखने लगता है और दूसरी किनारे पर टंगी पतंग की तरह है। लेकिन इसमें हो जाता है लोचा। क्या ? सवाल बहुतेरे हैं। जवाब आपके पास भी हो सकते हैं। लेकिन नॉन रेजिडेंट बिहारी पढ़कर देखिए-हर पन्ना आपको गुदगुदाते, चिकोटी काटते, याद-गली में भटकाते ले जाएगा एक दिलचस्प अनुभव की ओर।

बिहार से खुली ट्रेन को दिल्ली और लड़के को मुखर्जीनगर पहुँचना बदा है। लेकिन शालू को कहाँ जाना है? लाल बत्ती का क्या होगा ?

About author : शशिकान्त मिश्र पिछले 13 सालों से मीडिया में सक्रीय ! आठ साल से स्टार न्यूज, एबीपी न्यूज में, इससे पहले इंडिया टीवी में कार्यरत ! बिहार के कटिहार जिले में पला-बढ़ा ! अर्थशास्त्र में स्नातक और हिंदी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर की डिग्री है, लेकिन बस डिग्री ! बचपन से ही पढाई-लिखाई से छत्तीस का आंकड़ा रहा है ! आवारागर्दी में ज़माने की सैर करता रहता हूँ और वहीँ जिंदगी के मायने तलाशता हूँ ! ज्यादातर बिहारी स्टूडेंट की तरह लालबत्ती की ख्वाहिश लिए यूपीएससी वालों के मक्का मदीना मुखर्जी नगर पहुँच गया था ! लालबत्ती तो मिली नहीं, अलबत्ता 'एनआरबी' के लिए भरपूर 'मसाला' मिल गया ! 'एनआरबी' पहली रचना है ! कुछ और रचनाएँ फिलहाल लैपटॉप और मन-मस्तिष्क में कैद हैं ! उम्मीद है, जल्द ही रिहा होकर आपके हाथों में होंगी

Product details

  • Language ‏ : ‎ Hindi
  • Author Name  : Shashi kant mishra
  • Paperback ‏ : ‎ 120 pages
  • ISBN ‏ : ‎ 978-81-8361-796-3
  • Publisher : Radhakrishan Prakashan
  • Item Weight ‏ : ‎ 140 g
  • Dimensions ‏ : ‎ 20.3 x 25.4 x 4.7 cm

 

Check your subscription plan


Learn more Whatsapp your query

Buy Now